विश्व का सबसे बड़ा मंदिर कहां स्थित है?

यह मंदिर कंबोडिया देश के अंकॊर मैं स्थित है अंकॊर सिमरिप शहर में मिकांग नदी के किनारे स्थित है अंकोरवाट मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है इसके अलावा यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक भी है यहां के फ्लैग का चिन्ह भी हिंदू मंदिर है हिंदू धर्म ही वास्तव में विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है यह धर्म 14000 वर्ष से भी पुराना माना जाता है हिंदू धर्म के बाद ही धीरे-धीरे और सभी धर्म की स्थापना हुई इसीलिए हिंदू धर्म ही प्राचीन माना जाता है हिंदू धर्म में मूर्ति पूजा हवन ध्यान आदि पर विशेष महत्व दिया जाता है इस बात के कई सबूत हमारे धार्मिक ग्रंथो में भी मिलते हैं।

ढलता सूरज करता है प्रणाम

यह मंदिर कंबोडिया में स्थित है यह मंदिर अंकोरवाट मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है यह मंदिर दुनिया में सबसे अधिक सैलानियों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाला धार्मिक स्थल भी माना जाता है इस मंदिर मे दर्शनों के लिए हर साल 50% अंतरराष्ट्रीय पर्यटक कवॊड़िया आते हैं यहां ढलता हुआ सूरज ऐसा लगता है कि जैसे मानो यह भगवान को प्रणाम कर रहा है और ढलते हुए सूरज की रोशनी इस मंदिर की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती है।

बुद्ध और हिंदू अनुयाई के आस्था का केंद्र

आपको जानकारी आश्चर्य होगा कि अंकोरवाट मंदिर दो धर्म के लोगों की आस्था का केंद्र है उनमें से एक धर्म है हिंदू धर्म दूसरा है बौद्ध धर्म दोनों ही धर्म के लोग एक ही धार्मिक स्थल को अपना-अपना मानते हैं वह धार्मिक स्थल है कंबोडिया का अंकोरवाट मंदिर यह मंदिर हिंदू धर्म को समर्पित था लेकिन बाद में यह बौद्ध मंदिर बना दिया गया लेकिन आज भी हिंदू और बुद्ध धर्म के अनुयायी समान रूप से इस मंदिर में आस्था रखते हैं।

यह मंदिर किसने और कब बनवाया

यह है मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू धार्मिक स्थल है यह मंदिर कंबोडिया मैं स्थित है इस मंदिर को खमीर राजा सूर्य बर्मन द्वितीय द्वारा 12वीं शताब्दी में खमीर साम्राज्य की राजधानी यशोधरापुरा में बनाया था यह मंदिर काफी बड़ा एवं भव्य है यह मंदिर 402 एकड़ भूमि पर बनाया गया है पहले की समय में कंबोडिया का नाम कंपूचिया था इस मंदिर में भगवान विष्णु जी की भव्य और काफी बड़ी सुंदर मूर्ति है।

विशेषता

इस मंदिर की कई विशेषताएं हैं उसमें से एक मुख्य विशेषता यह है कि इस मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में स्थित है जबकि हिंदू तीर्थॊ में मंदिरों के मुख्य द्वार पूर्व दिशा में स्थित होते हैं इस मंदिर को मेरु पर्वत का रूप देते हुए बनाया गया है हिंदू धर्म में मेरु पर्वत को भगवान ब्रह्मा सहित अनेक देवताओं का निवास स्थान माना जाता है।

यह कंबोडिया का राष्ट्रीय प्रतीक भी है इस मंदिर में कुल 9 शिखर हैं इस मंदिर की दीवारों पर रामायण और महाभारत की चित्रकारी देखने को मिलती है जो हिंदू धर्म के गौरवशाली इतिहास को बयां करती है इस मंदिर के चारों ओर 700 फुट चौड़ी खाई है जो इस मंदिर की रक्षा करती है सन् 1992 में हिंदू और बौद्ध धर्म की इस धरोहर को विश्व विरासत स्थल घोषित कर दिया गया है।

इस मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर को यूनेस्को की ओर से वर्ल्ड हेरिटेज साइट यानी विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता मिली हुई है इस मंदिर की दीवारों पर भारतीय हिंदू धर्म ग्रंथो की प्रसंग में असुरों और देवताओं के बीच समुद्र मंथन आदि के दृश्य भी दिखाए गए हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर के चारों ओर गहरी खाई है जिसको पार करने के लिए एक पत्थर का पुल बनाया गया है यह मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बना है जिसके तीन खंड हैं इन तीनों खंडो में मूर्तियां बनाई गई हैं प्रत्येक खंड से ऊपर पहुंचने के लिए सीढ़ियां भी बनाई गई हैं प्रत्येक खंड में आठ गुम्मत है यह प्रत्येक गुम्मत 180 फीट ऊंचे हैं यह मंदिर तीसरे खंड की छत पर बना हुआ है।

इस मंदिर में प्रवेश के लिए एक विशाल द्वार बनाया गया है जो लगभग 1000 फुट चौड़ा है यह मंदिर 350 किलोमीटर लंबी पत्थर की दीवारों से चारों ओर से घिरा हुआ है इन दीवारों के बाद 700 फुट चौड़ी खाई है जिस पर एक जगह 36 फुट चौड़ा पुल बना हुआ है यह मंदिर करीब 162.16 हेक्टर में फैला हुआ है इसका क्षेत्रफल 8,20,000 वर्ग मीटर है इसलिए यह विश्व का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर कहा जाता है।

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